“तेरी मोहब्बत की रोशनी”
डॉ. मदन चन्द्र करन
तेरी आँखों में जो सुकून है,
वो किसी जन्नत से कम नहीं,
तेरी हँसी की जो चाँदनी है,
वो किसी रहमत से कम नहीं।
तू साथ हो तो हर ग़म हल्का,
तू दूर हो तो दिल वीरान,
तेरी यादों के साये में ही
मेरा हर लम्हा है मेहरबान।
तू ही मेरी दुआओं का हासिल,
तू ही मेरी रूह का नूर,
तेरे बिना ये दुनिया सूनी,
तेरे संग हर मंज़र भरपूर।
तेरी बातों में जैसे शबनम,
तेरी चुप में भी एक ग़ज़ल,
तू मिले तो मुकम्मल हूँ मैं,
तू बिछड़े तो अधूरा हर पल।
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