हिन्दी भक्ति गीत / Dr. Madan Chandra Karan /
हिन्दी भक्ति गीत Dr. Madan Chandra Karan “मैं नहीं, तुम दयामय” (मुखड़ा) भरत राजा कहे— मैं कुछ नहीं रे, मैं कुछ नहीं। अंतर-बाहर जहाँ निहारूँ, केवल दयामय, केवल दयामय।। १ राज-पाट, वैभव, मान-अभिमान क्षणभंगुर सब माया। चरणों में अर्पित कर दूँ सब— तुम ही सत्य-सहाया। मैं दास तुम्हारे नाम का, मेरा कुछ भी न होय—…
![]()




