फिर अगर जीवन मिले / डॉ. मदन चन्द्र करन /
गीत : फिर अगर जीवन मिले ✍️डॉ. मदन चन्द्र करन (अंतरा 1) फिर अगर जीवन मुझे मिले, तुम्हें ही मैं फिर से चाहूँगा। जैसे सूरज चाहे भोर को, जैसे चाँद समुंदर में खो। फिर अगर जीवन मुझे मिले, तुम्हें ही मैं फिर से चाहूँगा।। (मुखड़ा) ओ प्रीतम, ओ सपनों के साथी, तुम हो मेरी साँसों…
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